थैलेसिमिया पीड़ित बच्ची का हुआ निश्शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट, स्वजनों ने जताया आभार

Dec 17, 2025 - 20:48
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थैलेसिमिया पीड़ित बच्ची का हुआ निश्शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट, स्वजनों ने जताया आभार

थैलेसिमिया से पीड़ित नुआपड़ा की एक 11 वर्षीय बच्ची का मारवाड़ी युवा मंच खरियार रोड जागृति शाखा के प्रायस से मुंबई में निश्शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ है। मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद बच्ची अब स्वस्थ्य होकर घर लौट आई है। उसके शरीर में पर्याप्त खून बनने लगा है और रक्त चढ़ाना बंद कर दिया गया है। बच्ची के माता पिता ने बताया कि एक करोड़ आठ लाख रूपये का निश्शुल्क इलाज हुआ है। इसके लिए उन्होंने जागृति शाखा का आभार व्यक्त किया है। ज्ञात हो कि जागृति शाखा ने सिकलसेल और थैलेसिमिया से पीड़ित 11 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 23 जनवरी 2024 को अग्रसेन भवन में ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन(एचएलए) टेस्ट शिविर का आयोजन किया था। शिविर में ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्यप्रदेश से बच्चे पहुंचे थे। पीड़ित बच्चों के सगे भाई बहन, माता पिता आदि का टेस्ट करवाया गया था। सैंपल जांच के लिए विदेश भेजा गया। निश्शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट(बीएमटी) के लिए नौ बच्चों का एचएलए शत प्रतिशत मैच हुआ था। बीएमटी शिविर की प्रोजेक्ट डायरेक्टर रचना जैन ने बताया कि चार बच्चे मुंबई रवाना हुए थे। इनमें से नुआपड़ा की एक बच्ची सफल बीएमटी के बाद लौट आई है। गरियाबंद के एक बच्चे का भी सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो गया है और उसे जल्द छुट्टी मिलने वाली है। नुआपड़ा के दो बच्चे 45 दिनों से मुंबई में हैं, जल्दी ही इनका बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। रांची की एक बच्ची इसी हफ्ते मुंबई रवाना होगी। डॉक्यूमेंट्स पूरे होते ही बाकी बच्चे भी जल्द ही मुंबई भेजे जाएंगे। गौरतलब होगा कि अंचल में इस बीमारी से पीड़ितों की संख्या ज्यादा है। आए दिन बच्चों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। रक्त की आवश्यकता को पूरी करने शाखा समय समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन करते आ रही है। आपातकालीन स्थिति में तुरंत डोनर से संपर्क कर रक्त का प्रबंध भी किया जा रहा है। लेकिन यह समस्या का हल नहीं है। ऐसे में शाखा ने इन बीमारियों के स्थाई इलाज के विषय में जानकारी जुटाई। बोन मैरो ट्रांसप्लांट में लाखों का खर्च आता है, ज्यादातर लोग यह खर्च वहन नहीं कर पाते। ऐसे में निश्शुल्क इलाज की व्यवस्था की गई। रचना जैन ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए दस लाख रूपये कोल इंडिया से दिए गए। पांच लाख रूपये आयुष्मान कार्ड और कुछ राशि पीएम रिलीफ फंड से दी गई। बाकी खर्च अस्पताल और वहां की स्थानीय संस्थाओं ने उठाया। इस तरह यह इलाज निश्शुल्क संभव हो सका। इसके लिए बच्ची के माता पिता ने जागृति शाखा को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि बच्ची को बीते नौ वर्षों से बार बार रक्त चढ़ाना पड़ रहा था। इलाज के लिए पचास लाख का खर्च बताया गया था, लेकिन अब शाख के माध्यम से निश्शुल्क इलाज हो गया है। इस दौरान शाखा अध्यक्ष संगीता अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, ऋचा अग्रवाल समेत अन्य उपस्थित थे। नुआपाड़ा से बिस्वनाथ समलकी रिपोर्ट

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